*पत्रकारों पर टिप्पणी करने से पहले उनके जीवन के बारे मे जानें

2018-11-11 16:11:27
KTV24News Lucknow आजकल सोशल मीडिया पर पत्रकारों के बारे मे बहुत सी टिप्पणियां की जा रही हैं। कभी कहा जाता है बिकाऊ मीडिया तो कभी भांड मीडिया जैसे निचले स्तर के शब्दों का प्रयोग किया जाता है। कभी ऐसी टिप्पणी करने वालों ने किसी पत्रकार के जीवन मे झांक कर देखा है कि वो किन मुश्किल हालात से हर रोज रू-ब-रू होता है। कड़कती धूप हो मूसलाझार बरसात हो या हाड जमाने वाली ठंड हो पत्रकार हमेशा खबर को कवर करने के लिए समय पर पहुंचने की जल्दी मे रहता है। जब पत्रकारों पर जान लेवा हमले होते है तब पता नही कहां सो जाते है ऐसी छींटाकशी करने वाले। पत्रकार जनता को न्याय दिलाने के लिए नेताओं, समाज के ठेकेदारों, शासन- प्रशासन समेत पुलिस विभाग से भी जनता के लिए दुश्मनी मोल लेता है जिसका इनाम उसे ऐसे घटिया शब्द इस्तेमाल करके दिया जाता है। इतिहास गवाह है कि सच्चाई को सबके सामने लाने के लिए बहुत से पत्रकारों को जेल जाना पड़ा बहुतों को जान गवांनी पड़ी तो बहुतों को सच्चाई उजागर करने पर नौकरी से निकाल दिया गया। जब सुबह पत्रकार अपने घर से निकलता है तो उसके बच्चों को ये पता नही होता है कि शाम को उनके पिता सही सलामत आ भी सकेंगे या नही। एक पत्रकार ये सब अपने लिए या अपने बच्चों के लिए नही करता बल्कि उन लिए करता है जिसे वो ठीक से जानता भी नही। पत्रकारों को कोसने वालों जरा चार दिन पत्रकार के कन्धे से कन्धा मिलाकर चलो तुम अपनी ही नज़रों मे ना गिर जाओ तो कहना। अगर पत्रकार ना हों तो ये नेता, पुलिस व शासन प्रशासन जनता को बेच खाएंगे। मेरी गुजारिश है कि एक बार पत्रकार पर कमेंट करने से पहले उसके त्याग और तपस्या के बारे मे अवश्य सोच लें। विनय कौशिक। KTV24 News

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